उत्तराखंड: मम्मी! मम्मी! चिल्लातीं रहीं मासूम, आंखों के सामने सैलाब में बह गई मां

मेरी दुनिया है मां तेरे आंचल में, शीतल छाया तू दुख के जंगल में…। फिल्म तलाश के इस गीत की हर लाइनें यह संदेश देती हैं कि बच्चों के लिए उसकी मां की कितनी अहमियत है। यदि मासूमों की आंखों के सामने मां सैलाब में बह जाए और वह कुछ न कर पाए तो इससे बड़ा दुख उस बच्चों के लिए और क्या हो सकता है।

ऐसा ही कुछ दर्दनाक हादसा भाकुड़ी गांव निवासी उपेंद्र व उसके दो मासूम बच्चों अंशिका (5) व विद्या (3) के साथ हुआ। आराकोट व उसके आसपास के इलाकों में बादल फटने से हुई तबाही के दौरान उपेंद्र व उसके दो मासूम बच्चों के सामने पत्नी तरोजना सैलाब में बह गई। वह तरोजना के साथ दोनों मासूम बेटियों को कंधे पर बैठाकर सुरक्षित स्थान की ओर जा रहा था। तभी सैलाब आ गया और तरोजना बह गई।

पिता के कंधों पर बदहवासी की हालत में बैठी मासूम बेटियां अंशिका व विद्या मां को बेबस सैलाब में बहते देखती रह गईं। मां को सैलाब में बहते देख बेटियां मम्मी… मम्मी… चिल्लाती रहीं और वह सैलाब में गुम हो गई। हादसे के बाद दून अस्पताल में इलाज करा रहे उपेंद्र ने हादसे का हाल बयां किया तो उनका गला भर आया और आंखें नम हो गईं। पत्नी तरोजना को याद करते हुए उपेंद्र ने बताया कि बेटियों के कंधे पर सवार होने की वजह से कुछ भी नहीं कर पाया। अगर बेटियां को छोड़ता तो वे दोनों भी सैलाब में बह जातीं।

उत्तरकाशी में आपदा

बता दें कि इस हादसे के बाद जो दूसरा सैलाब आया तो उसमें वह भी बह गया था, लेकिन बेटियां सुरक्षित रहीं। सैलाब की चपेट में आने से वह घायल हो गया। मां को अपनी आंखों के सामने भयावह सैलाब में बहते देख दोनों बेटियां गुमसुम हैं।

उत्तरकाशी में आपदा

साथ ही उपेंद्र ने बताया कि उसके माता-पिता की 15 साल पहले ही मौत हो चुकी है। कोई भाई बहन नहीं है। ऐसे में दोनों बेटियों को देखने वाला कोई नहीं है। बहरहाल दोनों बेटियों को उसकी मौसी अपने साथ ले गई है। उपेंद्र को इस बात का मलाल है कि उसकी आंखों के सामने ही पत्नी सैलाब में गुम हो गई और वह कुछ नहीं कर पाया।

आपदा में घायल

उत्तरकाशी के आराकोट समेत कई इलाकों में बादल फटने से हुई तबाही के बाद हादसे में घायल लोगाें का दून आने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को एक गर्भवती समेत तीन घायलों को एयर लिफ्ट करके लाया गया। जिनमें आराकोट निवासी निशा व सागर को दून अस्पताल में भर्ती कराया गया। जबकि आराकोट की ही रहने वाली गर्भवती ललिता को गांधी शताब्दी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विशेषज्ञों की टीम उसका इलाज कर रही है।

उपेंद्र

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने बताया कि अस्पताल में भर्ती नौ मरीजों में से आठ की हालत स्थिर है। वहीं देर शाम सचिव चिकित्सा ने अस्पताल का दौरा कर मरीजों के इलाज की जानकारी ली और हरसंभव इलाज का आश्वासन दिया। उत्तरकाशी के आराकोट समेत कई इलाकों में बादल फटने से हुई भारी तबाही और जानमाल के नुुकसान की भरपाई को लेकर जहां राज्य सरकार की ओर से बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दून अस्पताल में भर्ती आपदा पीड़ितों के इलाज के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाइयां व अन्य चीजें नहीं मुहैया कराई जा रही हैं।

दून अस्पताल में मंगलवार को उस समय हंगामा हो गया, जब इलाज के दौरान एक पीड़ित के परिजनों से ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने सामान व दवाइयां लाने को कहा। पीड़ित परिजन सामान भी ले आए लेकिन इसी बात को लेकर बाद में हंगामा हो गया। जानकारी मिलने के साथ ही तीमारदारों की भीड़ मौके पर जमा हो गई और हंगामा कर दिया। प्रकरण की जानकारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा को दी गई तो वह भागकर मौके पर पहुंचे और आक्रोशित परिजनों को जैसे तैसे समझाकर शांत किया।

डॉ. टम्टा ने अपने पास से 360 रुपये परिजनों को लौटाए। साथ ही आश्वासन दिया कि तमाम चिकित्सकीय सुविधाएं व दवाइयां अस्पताल की ओर से ही मुहैया कराई जाएंगी। इस घटना के बाद चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने संबंधित डॉक्टर को हटाने की सिफारिश मेडिकल कॉलेज प्राचार्य से कर दी है। वहीं प्रकरण की जानकारी प्रभारी सचिव चिकित्सा डॉ. पंकज पांडे को मिली तो वे देर शाम दून अस्पताल पहुंचे और आपदा पीड़ितों से मुलाकात कर इलाज की जानकारी ली। उन्होंने हिदायत दी कि मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। 

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