एक नज़र में जानिये अरुण जेटली का राजनीतिक सफर

arun jaitley died

भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता,पूर्व वित्त मंत्री,राजग(राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के शासन में केंद्रीय न्याय मन्त्री के साथ-साथ कई बड़े पद पर आसीन अरुण जेटली का आज 12 बजकर सात मिनट पर दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया।

भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ देश ने एक कुशल अधिवक्ता और सुलझे हुए कद्दावर नेता को खो दिया। सांस लेने में परेशानी होने और बेचैनी महसूस होने के कारण 9 अगस्त 2019 को उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया था।

उनकी हालत बेहद गंभीर होने के कारण उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। जहां उनसे मिलने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद हॉस्पिटल गए थे। उनकी हालत नाजुक होने के बाद शीर्ष नेताओं का उनसे मिलने के लिए ताँता लगा हुआ था। आज अरुण जेटली के देहांत के बाद पूरा देश शोक में डूबा हुआ।

अरुण जेटली की जीवनी …

उनका जन्म महाराज किशन जेटली और रतन प्रभा जेटली के घर में हुआ। उनके पिता एक वकील थे। उन्होंने अपने विद्यालय की शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल, नई दिल्ली से 1957-69 में पूरी की थी इसके बाद उन्होंने अपनी 1973 में श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, नई दिल्ली से कॉमर्स में स्नातक की और 1977 में दिल्ली विश्‍वविद्यालय के विधि संकाय से विधि की डिग्री प्राप्त की।

वो 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संगठन के अध्यक्ष भी रहे। अरुण जेटली ने 24 मई 1982 को संगीता जेटली से विवाह कर लिया इसके बाद उनके दो बच्चे, पुत्र रोहन और पुत्री सोनाली हुए। जिसके बाद जेटली ने 1991 में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यता हासिल की। वह 1999 के आम चुनाव से पहले की अवधि के दौरान भाजपा के प्रवक्ता भी रहे।1999 में, भाजपा की वाजपेयी सरकार के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सत्ता में आने के बाद, उन्हें 13 अक्टूबर 1999 को सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नियुक्त किया गया। इतना ही नहीं उन्होंने 23 जुलाई 2000 को कानून, न्याय और कंपनी मामलों के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में राम जेठमलानी के इस्तीफे के बाद कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला।

उन्हें 1 जुलाई 2001 से केंद्रीय मंत्री, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्री के रूप में 1 जुलाई 2002 को नौवहन के कार्यालय को भाजपा और उसके राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में शामिल किया गया यहाँ उन्होंने जनवरी 2003 तक काम किया। उन्होंने 29 जनवरी 2003 को केंद्रीय मंत्रिमंडल को वाणिज्य और उद्योग और कानून और न्याय मंत्री के रूप में फिर से नियुक्त किया गया।उन्हें 3 जून 2009 को एल.के.आडवाणी द्वारा राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में चुना गया था। 1980 से पार्टी में होने के कारण उन्होंने 2014 तक कभी कोई सीधा चुनाव नहीं लड़ा। 2014 के आम चुनाव में वह लोकसभा सीट पर अमृतसर सीट के लिए भाजपा के उम्मीदवार थे , लेकिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार अमरिंदर सिंह से हार गए ।

वह गुजरात से राज्यसभा सदस्य थे। उन्हें मार्च 2018 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए फिर से चुना गया। इसके बाद 26 मई 2014 को, जेटली को नवनिर्वाचित प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वित्त मंत्री के रूप में चुना गया। बिहार विधान सभा चुनाव, 2015 के दौरान, अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात पर सहमति व्यक्त की कि धर्म के आधार पर आरक्षण का विचार खतरे से भरा है और मुस्लिम दलितों और ईसाई दलितों को आरक्षण देने के खिलाफ है क्योंकि यह जनसांख्यिकी को प्रभावित कर सकता है। नवंबर 2015 में, जेटली ने कहा कि विवाह और तलाक को नियंत्रित करने वाले व्यक्तिगत कानून मौलिक अधिकारों के अधीन होने चाहिए, क्योंकि संवैधानिक रूप से गारंटीकृत अधिकार सर्वोच्च हैं।

उन्होंने सितंबर 2016 में आय घोषणा योजना की घोषणा की थी साथ ही भारत के वित्त मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, सरकार ने 9 नवंबर, 2016 से भ्रष्टाचार, काले धन, नकली मुद्रा और आतंकवाद पर अंकुश लगाने के इरादे से महात्मा गांधी श्रृंखला के 500 और 1000 के नोटों का विमुद्रीकरण भी किया था। 20 जून, 2017 को उन्होंने पुष्टि की थी कि जीएसटी रोलआउट अच्छी तरह से और सही मायने में ट्रैक पर है।

इस बात पर उनकी बहुत किरकिरी भी हो चुकी थी। लेकिन इसके बावजूद वे अपने फैसलों पर डटें रहते थे और बड़ी ही सहजता से अपनी बात रखते थे। आज भले ही वे हम सब के बीच मौजूद नहीं है पर उनकी कही हुई बातें और उनके लिए हुए फैसले हमेशा हमारे बीच रहेंगे।

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