जब मुन्ना बजरंगी ने पूर्वांचल के बाहुबली और BJP विधायक कृष्णानंद राय को किया था AK-47 की 400 गोलियों से छलनी

पूर्वांचल की सियासत में बाहुबलियों का वर्चस्वा दशकों पुराना है। वर्चस्वा के इस जंग में पूर्वांचल की धरती कई बार लहूलुहान हो चुकी है। ऐसी ही एक जंग का खुनी अंत हुआ था नवंबर 2005 में। बीजेपी विधायक कृष्णा नन्द राय की हत्या ने यूपी की सियासत को हिलाकर रख दिया था। इनकी हत्या में मुख्तार अंसारी का नाम शामिल था। कहा जाता की मुख्तार अंसारी कृष्णा नन्द राय के नाम से कांपता था। कहा तो ये भी जाता है कि की वक़्त था जब ये दोनों एक दूसरे के खून के प्यासे थे।

कृष्णा नन्द राय की कहानी किसी थ्रिलर फिल्म की स्क्रिप्ट से काम नहीं है। बताया जाता है की 90 के दशक के आखिर में पूर्वांचल के सरकारी ठेकों और वसूली के काम पर मुख्तार अंसारी का कब्ज़ा था। लेकिन इसी दौर में बीजेपी के विधयक कृष्णा नन्द राय भी तेजी से उभर रहे थे वे खुद एक बाहुबली थे जिसके दर से लोग कांपते थे। इनकी धमक अंडरवर्ल्ड में भी सुनाई देने लगी थी वे मुख्तार की आँखों में चुभने लगे थे और लगातार उसके लिए चुनौती बनते जा रहे थे। जिसे मुख्तार हर हाल में रास्ते से हटाना चाहता था। बताया जाता है की मुख्तार अंसारी ने मुन्ना बजरंगी के हांथो राय को मरवाने की साजिश भी रची थी। 29 नवंबर 2005 को गाजीपुर में कृष्णा नन्द राय की गाड़ी पर AK 47 से हमला किया गया था जिसमे राय के साथ 7 लोगों को मौत के घाट उतार दिए गए थे। ।

29 तारीख को राय को बगल के गांव सियारी क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन करने जाना था इसलिए वो इतने निश्चिंत थे की अपनी बुलेट प्रूफ गाडी घर में ही छोड़ दी और दूसरी गाडी से शाम के वक़्त निकले। ये उनके जीवन की आखरी भूल थी। बसनिया चट्टी गांव से ढेड़ किलोमीटर आगे जाने पर सिल्वर ग्रे कलर की suv सामने से आई उसमे से निकले। 7-8 लोगों ने AK-47 से गोलियों की बौछार कर विधायक समेत सात लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। कृष्णा नन्द राय पर AK 47 से 400 गोलियां दागीं गई थी। अपराधियों को पता था की कृष्णा नन्द राय अपने बुलेट प्रूफ गाडी में नहीं है। राय को मारने के बाद हत्यारे निशानी के तौर पर अंगूठी निकाल कर ले गए थे। कृष्णानंद राय (11 दिसंबर 1956 – 29 नवंबर 2005) एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे।

उन्होंने 2002 से 2005 तक गाजीपुर जिले में स्थित मुहम्मदाबाद विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हुए विधान सभा के सदस्य के रूप में कार्य किया। राजनीति में उनका पहला कार्यकाल वर्ष 1999 में उसी विधानसभा सीट से था, जिसे उन्होंने खो दिया था। वह अपनी मृत्यु तक भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा थे।बीजेपी ने हर साल 29 नवंबर को शहादत दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। तब से अब तक स्व. कृष्णानंद राय व उनके सहयोगियों को याद करने के लिए शहीद पार्क मुहम्मदाबाद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है।

स्व.कृष्णानंद राय की प्रथम पुण्यतिथि उनके पैतृक गांव गोड़उर में मनाई गई थी, जिसमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण अडवाणी, राजनाथ सिंह सहित कई दिग्गजों ने शिरकत की थी।

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