कहानी फूलन देवी की, जिसने बलात्कार का बदला लेने के लिए 22 ठाकुरों की जान ले ली

अमूमन किसी भी व्यक्ति के प्रति लोगों की आम राय होती है, किन्तु कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन पर सबकी एक राय नहीं होती!उसके समाज में दो पहलू होते हैं. एक पहलू उसकी अच्छी छवि प्रदर्शित करता है, तो दूसरे पहलू में उसकी नकारात्मक छवि होती है.दस्यु रानी’ फूलन देवी एक ऐसा ही नाम है, जो सोचने पर मजबूर कर देता है कि उसके बारे में क्या कहें…


शुरुआत करे एक 10 साल की मासूम लड़की से जो अपने पिता की जमीन के लिए लोगों से लड़ गई थी या बात करे उस बालिका वधु की जिसके बूढ़े पति ने उसके साथ जबरदस्ती शादी का हवाला देकर बालात्कार किया था। एक बेसहारा लड़की जिसको जिन्दा लाश बना कर चील-कौओं की तरह श्रीराम ठाकुर के गैंग के 22 लोगों ने 3 हफ़्तों तक बालात्कार किया।

हम बात करे एक खतरनाक डाकू की जिसके व्यक्तित्व के दो पहलू है,एक जो उनकी अच्छाई को दर्शाता है और दूसरी जिसने बेहमई गांव के 22 लोगों को लाइन से खड़ा कर मौत के घाट उतार दिया था। फूलन देवी की जिंदगी को जितनी करीब से जानने की कोशिश करो उतने ही दर्द भरे पन्ने निकल कर आएंगे पर सिर्फ ऊपर से देखो तो वो एक खतरनाक डाकू के सिवा कुछ नहीं।

10 अगस्त 1963 को यूपी में जालौन के घूरा का पुरवा में फूलन का जन्म हुआ था। गरीब और छोटी जाती की होने के बावजूद फूलन दूसरों की तरह दब कर रहने वालों में से नहीं थी बल्कि डट कर लड़ने वालों में से थी। फूलन सिर्फ 10 साल की थी जब उनके चाचा ने उनके पिता की जमीन पर कब्ज़ा कर लिया था,इस बात पर वे अपने चाचा से लड़ गई थी और और धरना दे दिया था। जिसका अंजाम ये हुआ की इसकी सजा फूलन को अपने से 4 गुना बड़े आदमी से शादी कर चुकानी पड़ी और ये वो वक़्त था जब फूलन की जिंदगी में उनके साथ-साथ दुःख,दर्द भी मानों चुम्बक की तरह चिपक गए।

उनके बूढ़े पति ने शादी का हवाला देकर उनके साथ बालात्कार किया। ससुराल में धीरे-धीरे उनके सेहत बिगड़ने लगी जिसके कारण वो मायके चली आई। पर कुछ दिनों बाद ही फूलन के भाई ने उन्हें वापस मायके भेज दिया। फूलन को मायके जाकर पता लगा की उनके पति ने दूसरी शादी कर ली है। वे अपने ससुराल से वापस आ गई। और इसके बाद ही शुरुआत हुई सीधी-साधी फूलन से बैंडिड क्वीन की कहानी। फूलन कुछ नए लोगों से मिली जो डाकुओं के गैंग से जुड़े हुए थे। धीरे-धीरे फूलन उनमे घुलने-मिलने लगी हालाँकि फूलन ने ये कभी क्लियर नहीं किया कि अपनी मर्जी से उनके साथ गई थी या फिर उन लोगों ने उन्हें उठा लिया था।

लेकिन एक बार फूलन देवी ने अपनी आत्मकथा सुनाते हुए कहा था की-शायद किस्मत को यही मंजूर था। अब बात करे फूलन देवी के गैंग में शामिल होने की, तो यहाँ आने के बाद भी फूलन की मुसीबत कम होने के बजाय और बढ़ गई। सरदार बाबू गुज्जर फूलन पर आसक्त हो गया। इस बात को लेकर उसी गैंग के विक्रम मल्लाह ने उसकी हत्या कर दी और उसकी जगह सरदार बन गया। फूलन और विक्रम साथ रहने लगे। विक्रम का साथ मिलने के बाद एक दिन फूलन अपने गैंग के साथ अपने पति के गांव गई। वहां उसे और उसकी बीवी दोनों से फूलन ने बदला लिया। फूलन देवी डाकुओं की गैंग में पूरी तरह शामिल हो गई और उनका कारवां ठाकुरों के एक गैंग से भीड़ गया। ये गैंग श्रीराम ठाकुर और लाला ठाकुर का था।

ये दोनों ही गुज्जर की हत्या से नाराज थे और इसका जिम्मेदार फूलन देवी को मानते थे। इन दोनों गुटों में लड़ाई हुई जिसमे विक्रम मल्लाह मारा गया। जिसके बाद ठाकुरों के गैंग ने फूलन को किडनैप कर बेहमई गांव में 3 हफ्ते तक बलात्कार किया। ये पूरा दृश्य फूलन देवी पर बनी फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’में दिखाया गया है, जिसको बनाने से पहले शेखर कपूर ने एक बार भी फूलन देवी से पूछना जरुरी नहीं समझा था। खैर,ठाकुरों से छूटने के बाद बाद फूलन वापस डाकुओं के गैंग में शामिल हो गई। 1981 में फूलन बेहमई गांव लौटी और उसने दो लोगों को पहचान लिया, जिन्होंने उसका रेप किया था। उन्होंने ठाकुरों से बदला लिया और गांव से 22 ठाकुरों को निकालकर गोली मार दी। यही वो हत्याकांड था, जिसने फूलन की छवि एक खूंखार डकैत की बना दी।

कहने वाले कहते हैं कि ठाकुरों की मौत थी इसीलिए राजनीतिक तंत्र फूलन के पीछे पड़ गया था मतलब अपराधियों से निबटने में भी पहले जाति देखी गई थी। पुलिस फूलन के पीछे पड़ी हुई थी। उनके सर पर इनाम रखा गया था तभी मीडिया ने फूलन को नया नाम दिया: बैंडिट क्वीन। उस वक़्त देश में एक दूसरी क्वीन भी थीं: प्रधानमन्त्री इंदिरा गांधी।

यूपी में एक राजा थे: मुख्यमंत्री वी. पी. सिंह जिनको बेहमई कांड के बाद रिजाइन करना पड़ा था भिंड के एसपी राजेंद्र चतुर्वेदी इस बीच फूलन के गैंग से बात करते रहे थे। इस बात की कम कहानियां हैं, पर एसपी की व्यवहार-कुशलता का ही ये कमाल था कि दो साल बाद फूलन आत्मसमर्पण करने के लिए राजी हो गईं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामनेउन्होंने आत्मसमर्पण किया। उन पर 22 हत्या, 30 डकैती और 18 अपहरण के चार्जेज लगे थे। वो 11 साल जेल में रही। इसके बाद मुलायम सिंह की सरकार ने 1993 में उन पर लगे सारे आरोप वापस लेने का फैसला किया।

देखा जाए तो राजनीतिक रूप से ये बड़ा फैसला था सब लोग इस फैसले से हैरान थे । 1994 में फूलन जेल से छूट गईं और उम्मेद सिंह से उनकी शादी हो गई। अरुंधती रॉय ने लिखा है: जेल में फूलन से बिना पूछे ऑपरेशन कर उनका यूटरस निकाल दिया गया था। डॉक्टर ने पूछने पर कहा था की अब ये दूसरी फूलन नहीं पैदा कर पायेगी। एक औरत से उसके शरीर का एक अंग बीमारी में ही सही, पर बाहर कर दिया जाता है और उससे पूछा भी नहीं जाता। 1996 में फूलन देवी ने समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा और जीत गईं।

वो मिर्जापुर से सांसद बनींऔर चम्बल में घूमने वाली अब दिल्ली के अशोका रोड के शानदार बंगले में रहने लगी।25 जुलाई 2001 को फूलन देवी का ‘फैन’25 जुलाई 2001 को शेर सिंह राणा उनसे से मिलने आया और इच्छा जाहिर की कि फूलन के संगठन ‘एकलव्य सेना’ से जुड़ेगा। फूलन ने उसे खीर खिलाई,पर उन्हें भी कहा पता था की नागपंचमी के दिन वे जिसे खीर खिला रही है वो खुद नाग बन उन्हें डस लेगा। घर के गेट पर शेर सिंह राणा ने फूलन को गोली मार दी और कहा कि मैंने बेहमई हत्याकांड का बदला लिया है। 14 अगस्त 2014 को दिल्ली की एक अदालत ने शेर सिंह राणा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अपने कुल 38 साल के जीवन में फूलन की कहानी भारतीय समाज की हर बुराई को समेटे हुए है। उनकी दर्द भरी कहानी चीख-चीख के देश में हो रहे अत्याचारों से हमें रूबरू कराती है। ऐसा कहना बहुत आसान है की यह सब उनके साथ हुए बालात्कार का नतीजा था लेकिन अगर ऐसा होता अगर बलात्कार ही फूलन देवी बनाता तो देश में हजारों फूलन देवियां घूम रही होतीं। ये पूरी ‘मर्दवादी संस्कृति’ की पैदाइश है। जाति, जमीन, औरत, मर्द सब कुछ समेटे हुए है ये कहानी।

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